The sick environments you cannot heal in

 



When you alone in your life..



If your pain is deep...


 


जीवन की दशा

जब भी मैं सोचता हुँ की ये जीवन क्या है? मैं सोच में पर जाता हूँ कई सवाल मुहँ उठाये मेरे सामने खड़े हो जाते है और फिर वे सारे सवाल अपन अंदर कई सवालों को लिए एक विकृत रूप धारण कर लेते है और फिर मेरे दिमाग को शून्य कर जाते है, शून्य जहाँ से इस सृष्टि की शुरुआत होती है फिर ये सृष्टि सृजन करती है और जन्म मृत्यु का कारण बनती है।

जीवन सृष्टि द्वारा रचित उन अनमोल मोतियों में से एक है जो जितनी ठोकरें खाती है उतना ही शौर्य प्राप्त करती है, और शौर्य जीवन की चमक आभा को उस शीर्ष पे ले जाती है जहां से प्रकाश दीप्तिमान होता है।
आज हमने अपने जीवन की दशा को एक दुर्दशा मे परिवर्तित कर दिया है एक ऐसी दुर्दशा जो अपना अस्तित्व ही खोता जा रहा है, भूल गए है हम जन्म क्यूँ लिए है , भूल गए है हम कौन है, भूल गए है हम क्या कर सकते है, हम सबकुछ भूल गए, पता है तो क्या बस इतना की इंसान जन्म लेता है बड़ा होता है और फिर इस सृष्टि मे विलीन हो जाता है बस यही ? नहीं बिल्कुल नहीं!
आत्मा इंसान में परमात्मा के होने का साक्ष्य है जिसे हम युँ ही विनील नहीं होने दे सकते, हमें समझना होगा, हमें अपने आप को समझाना होगा, हमें अपनी शक्तियों को समझना होगा। इंसानी शक्ति अपरम्पार है, इसकी ऊर्जा विशाल है इसका सही इस्तेमाल करना होगा ।
इंसान का जन्म सिर्फ मरने के लिए नहीं होता है, इंसान का जन्म धरती की उस हिस्से को पूरा करने के लिए होता है जो हिस्सा उसके बिना अधूरा है लेकिन मनुष्य भटकता रहता है उस हिस्से की खोज मे, जो कहीं लुप्त है।
जो इंसान अपने सभी कर्मों के यथावत पूरा करते हुए चला जाता है वही धरती के उससे हिस्से तक पहुंचता है और जो इंसान सिर्फ सोचने मे अपना समय व्यर्थ गंवाता है वह जीवन मरण के इस चक्र मे पिसता रहता है उसे कहीं शांति नहीं मिलती अंततः वह विलुप्त हो जाता है।
लोग आज जीवन का वास्तविक अस्तित्व खो रहे है लोगों ने अपने जीवन को सीमित कर लिया है। आज हमारी जीवन की दशा इतनी बुरी हो चुकी है कि हम सच-झूठ, पाप-पुण्य, कर्म-दुष्कर्म, इन सभी मे भेद करना भूल गए है। और भेद करना आता भी है तो किसमें - इंसानों में हम भेद करते है, हमेशा जात-पात के नाम पर लड़ते रहते है। क्या इसी का नाम जीवन है?
मेरे समझ से तो नहीं !!!
आपको मेरी ये कहानी कैसी लगी अगर अच्छी लगी तो शेयर जरूर करें धन्यवाद 🙏🙏🙏 
By Amit Kumar Soni
#LIFE #AKS 

तेरी जुदाई का ग़म।

तेरी जुदाई के गम मे जिया नही जाता,

इन आसुओँ के सागर को पिया नही जाता,

तडपता रहता हुँ याद मे तेरी,

अब इस तडपन का भी दर्द मुझसे सहा नही जाता 

तेरी जुदाई के गम मे जिया नही जाता।


रुलाते कयो हो बार बार पयार का इमतहान लेकर,

जित लिया है मैने दिल तुमहारा अपनी जान देकर, 

हर किसी को ये दिल दिया नही जाता,

तेरी जुदाई के गम मे जिया नही जाता।


तेरी याद मे पल पल कया हर पल मरता हुँ,

कयोकि मैँ पयार तुमसे करता हुँ,

तभी तो तुमहे भी कोई दुखःदर्द दिया नही जाता,

तेरी जुदाई के गम मे जिया नही जाता।

#KK, #AKS 


बड़ा कौन ?

अक्सर हम सोचा करते हैं की बड़ा कौन ? जब कभी हम किसी से बातें करते हैं तो सोचते हैं की हम बड़ें हैं तो हम बड़ें हैं और हम इसी बात पे अड़े रहतें हैं और हर संभव प्रयास करते हैं अपने को बड़े साबित करने का क्या यही बड़े होने की निशानी है ? जो लोग बड़े-बड़े घरों में रहतें है या जो लोग विद्वान हैं, हमेशा पूजा पाठ करते रहतें हैं और दूसरों को उपदेश देते हैं क्या वे बड़ें हैं ? नहीं बिलकुल नहीं, 

एक बार जब मैं दिल्ली में रहता था मैं किसी काम से एक हॉस्पिटल में गया मैंने देखा की एक परिवार हॉस्पिटल के गलियारे में एक बोरे पे बैठा हुआ है वे लोग दुखी दिखाई पर रहे थे, वे चार लोग थे तभी एक बूढ़ा व्यक्ति उनकी ओर आया और उनसे कुछ खाने को माँगा। वे चारो स्वयं तो फ़टे पुराने कपड़े पहने बदहाल नज़र आ रहे थे, फटेहाल  गरीबी से पीड़ित दिखाई दे रहे थे साथ ही बीमारी से जूझ रहे थें, फिर भी उन्होंने उस बूढ़े व्यक्ति को अपने पास बैठाया अपने झोले से चार रोटी और सब्जी निकल कर दिए और बोले लीजिये बाबा यहाँ बैठकर भोजन कीजिये, तभी वो बूढ़ा व्यक्ति बोला भगवान् तुम्हे सुखी रखें और खाना शुरू किया, तभी उसमें से एक व्यक्ति उठकर कही गया और  गिलास में पानी लाया और उन्हें पानी पिने को दिया। मैंने ये सारी घटनाएं देखी तभी मुझे समझ में आया की बड़ा कौन होता है। 

मानव कोई बड़ा या छोटा नहीं होता बड़ा या छोटा उसकी मानवता होती है, इसीलिए आपलोगों से गुजारिश है दूसरों की सेवा करें, दूसरों की मदद करे और जहाँ तक हो सके अच्छे कर्म करें बुराई न करें। 

By Amit Kumar Soni

#AKS


राम राम जी। एक आदमी बर्फ बनाने वाली कम्पनी में काम करता था !

एक आदमी बर्फ बनाने वाली कम्पनी में काम करता था___
एक दिन कारखाना बन्द होने से पहले अकेला फ्रिज करने वाले कमरे का चक्कर लगाने गया तो गलती से दरवाजा बंद हो गया
और वह अंदर बर्फ वाले हिस्से में फंस गया छुट्टी का वक़्त था और सब काम करने वाले लोग घर जा रहे थे
किसी ने भी अधिक ध्यान नहीं दिया की कोई अंदर फंस गया है। वह समझ गया की दो-तीन घंटे बाद उसका शरीर बर्फ बन जाएगा अब जब मौत सामने नजर आने लगी तो
भगवान को सच्चे मन से याद करने लगा।
अपने कर्मों की क्षमा मांगने लगा और भगवान से कहा कि 
प्रभु अगर मैंने जिंदगी में कोई एक काम भी मानवता व धर्म का किया है तो तूम मुझे यहाँ से बाहर निकालो।
मेरे बीवी बच्चे मेरा इंतज़ार कर रहे होंगे। उनका पेट पालने वाला इस दुनिया में सिर्फ मैं ही हूँ।
मैं पुरे जीवन आपके इस उपकार को याद रखूंगा और इतना कहते कहते उसकी आंखों से आंसू निकलने लगे।
एक घंटे ही गुजरे थे कि अचानक फ़्रीजर रूम में खट खट की आवाज हुई।
दरवाजा खुला चौकीदार भागता हुआ आया।
उस आदमी को उठाकर बाहर निकाला और गर्म हीटर के पास ले गया।
उसकी हालत कुछ देर बाद ठीक हुई तो उसने चौकीदार से पूछा, आप अंदर कैसे आए ?
चौकीदार बोला कि साहब मैं 20 साल से यहां काम कर रहा हूं। इस कारखाने में काम करते हुए हर रोज सैकड़ों मजदूर और ऑफिसर कारखाने में आते जाते हैं।
मैं देखता हूं लेकिन आप उन कुछ लोगों में से हो, जो जब भी कारखाने में आते हो तो मुझसे हंस कर 
*राम राम* करते हो
और हालचाल पूछते हो और निकलते हुए आपका 
*राम राम काका*
कहना मेरी सारे दिन की थकावट दूर कर देता है।
जबकि अक्सर लोग मेरे पास से यूं गुजर जाते हैं कि जैसे मैं हूं ही नहीं।
आज हर दिनों की तरह मैंने आपका आते हुए अभिवादन तो सुना लेकिन 
*राम राम काका* 
सुनने के लिए इंतज़ार 
करता रहा।
जब ज्यादा देर हो गई तो मैं आपको तलाश करने चल पड़ा कि कहीं आप किसी मुश्किल में ना फंसे हो।
वह आदमी हैरान हो गया कि किसी को हंसकर
*राम राम* कहने जैसे छोटे काम की वजह से आज उसकी जान बच गई।
*राम कहने से तर जाओगे*
मीठे बोल बोलो, 
संवर जाओगे,
सब की अपनी जिंदगी है 
यहाँ कोई किसी का नही खाता है।
जो दोगे औरों को,
वही वापस लौट कर आता है।
राम राम जी 🙏
x